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Makar Sankranti 2022: मकर संक्रांति की कहानी पूजा विधि और महत्व क्यों मानते है

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मकर संक्रांति क्यों मनाया जाता है? जैसा कि आप जानते हैं भारत में शुरुआत के समय से? प्रकृति को देवों का स्थान दिया गया है और मकर संक्रांति का त्यौहार जो है वो भी प्रकृति को ही समर्पित है।

दरअसल, यह एक पूरी तरीके से वैज्ञानिक त्योहार है और सूर्य की स्थिती जो बदलती है उस कारण से इस त्योहार को मनाया जाता है। जैसा कि आप जानते हैं कि सनातन धर्म और हिंदू धर्म में अधिकतर जो परंपराएं और मान्यताएँ हैं, वो वैज्ञानिक दृष्टिकोण से बनाई गई है।

मकर संक्रांति को भारत के अलग अलग राज्यों में अलग अलग नामों से जाना जाता है और अलग अलग तरीकों से मनाया जाता है। गुजरात में मकर संक्रांति को लोग उत्तरायण के नाम से जानते हैं।

तो वहीं राजस्थान, बिहार और झारखंड में इसे संक्रांति कहा जाता है। तमिलनाडु में इसे पोंगल के रूप में आंध्र प्रदेश, कर्नाटक का और केरला में केवल संक्रांति के नाम से जाना जाता है तो उत्तर प्रदेश में कहीं इसको खिचड़ी के नाम से जाना जाता है।

भाई इसके पीछे की क्या कहानी हैं, मैं आपको बताता हूँ। हिंदू धर्म में माह को दो पक्षों में बांटा गया है। कृष्णपक्ष और शुक्लपक्ष। ठीक इसी तरह से। वर्ष को भी दो पक्षों में बांटा गया है।
एक है उत्तरायण और एक है, दक्षिणायण।

अगर दोनों को मिला दिया जाए तो एक वर्ष पूरा हो जाता है। मकर संक्रांति के दिन। से सूर्य की उत्तरायण गति प्रारम्भ हो जाती है, इसलिए मकर संक्रांति को उत्तरायण भी कहते हैं।

इसके अलावा पुष मास में जब सूर्य धनु राशि को छोड़कर। मकर राशि में प्रवेश करता है तब मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है, क्योंकि सूर्य जो है वो धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है।

मकर संक्रांति
Makar Sankranti 2022: मकर संक्रांति की कहानी पूजा विधि और महत्व क्यों मानते है
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इसीलिए इसे मकर संक्रांति के नाम से जाना जाता है। मकर संक्रांति एक ऐसा त्योहार है जिसे संपूर्ण भारतवर्ष में मनाया जाता है। हर साल जनवरी के 14 तारीख को मकर संक्रांति मनाया जाता है।

तो ये त्योहार मनाने के पीछे ये सारे वैज्ञानिक कारण नहीं है। इसके अलावा कुछ धार्मिक मान्यताएँ भी हैं जैसे कि हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार आज के दिन। यानी मकर संक्रांति के दिन भगवान बिष्नु ने असुरों का अंत करके उनके सिरों को मंदार पर्वत में दबाकर युद्ध की समाप्ति की घोषणा की थी।

इसलिए इस मकर संक्रांति के दिन को बुराइयों और नकारात्मकता को समाप्त करने का दिन भी मानते हैं। कहीं कहीं आज के दिन पतंग उड़ाने का भी परंपरा होता है। पूरे भारत में इस त्योहार को हर्षोल्लास से मनाया जाता है।

तो मकर संक्रांति त्योहार मनाने के पीछे। मुख्य कारण जो थे और मान्यताएँ थी, वो मैंने आपको बता दिए। अब हम आपको Makar Sankranti की कथा और कहानी को बताते है।

Makar Sankranti की कथा और कहानी

एक समय की बात है कि राजा बाबू वाहन महोदयपुरम मेराज करता था। वो राजा बड़ा धर्मात्मा और दयालु था। उसके राज्य में हरि दास विष्णु सेवक बड़ा ही तेजस्वी था। उसकी पत्नी भी बहुत सुशील और धर्मवती थी जिसका नाम गुणवती था। हरिदास थी जिसका नाम गुणवती था। हरि दास विष्णु सेवक बड़ा तपस्वी था। तनु साल उसकी पत्नी श्री भगवान के भक्त और पतिव्रता थी।

उसने सभी देवताओं के व्रत की पर इंतज़ार में राजकीय सेवा का भी नहीं गयी। वो बडी श्रद्धा से एकादशी का व्रत करते हुए शक्ति दान भी करती रहती थी। और अतिथि सेवा से कभी विमुख नहीं रहे।

इसी प्रकार धर्मपरायण ये वृद्ध अवस्था में मृत्यु को प्राप्त हुई तो धर्म के प्रभाव से यमदूत उसे आदरपूर्वक धर्मराज के पूर्व को ले गए। वहाँ पहुंचने के बाद चित्रगुप्त जी ने उनके पूर्व जन्म के किए हुए पाप पुण्य का लेखा जोखा पढ़ कर सुनाया।

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धर्मराज्य गुणवती की भक्ति देखकर प्रसन्न हुए पर कुछ उदासी भी उनके मुखमंडल पर झूलती हुई गुणवती को दिखाई दीं। धर्मराज को उदास देखकर गुणवती ने निवेदन किया कि हे प्रभु कोई बुरा काम नहीं किया। फिर भी आप उदास क्यों हैं, इसका कारण बताइए?

धर्मराज ने कहा, हे देवी तुम ने व्रत आदि से सभी देवों को संतुष्ट किया है परंतु मेरे नाम से तुम्हें कुछ भी दानपुर नहीं किया। ये सुनकर गुणवती ने कहा हे भगवान मेरा अपराध क्षमा करें। मैं आप की उपासना नहीं जानती थी।

अब आप ही कृपा करके उपाय बताएं जिससे मनुष्य आपके प्रीति के पात्र बन सके यदि मैं आपकी भक्ति मार्ग को आपके मुख्य से श्रवण कर वापस मृत्युलोक में जा सकू और आप को संतुष्ट करने का उपाय करूँगी?

धर्मराज ने कहा सूर्य भगवान के उत्तरनारायण में जाते ही जो मकर संक्रांति आती है उस दिन से मेरी पूजा शुरू करनी चाहिए। इस प्रकार साल भर मेरी कथा सुनें और मेरी पूजा करें। इसमें कभी ना अगर नहीं करे आपातकाल आने पर भी। मैंने धर्म के इन 10 अंगों का पालन करते रहे।

संतोषी और क्षमा भाव रखना नियम द्वारा मन को वश में करना किसी की वस्तु को नहीं चुराना मन से स्त्री और पुरुषों से बचना। यानी मन की शुद्धि और शारीरिक शुद्धि, इंद्रियों को वश में रखना, बुद्धि की पवित्रता यानी मन में बुरे विचार ना आने देना, पाठ, पूजा और कथा श्रवण करना, व्रत रखना और उसके अनुसार दान पुण्य करना।

सत्य बोलना और क्रोध न करना ये 10 धर्म कलेक्शन है और मेरी कथा को नियम से सदा सुनते रहे, पढता रहे और यथाशक्ति दान पुण्य और परोपकार करते रहे। जब साल भर बाद फिर मकर संक्रांति आये तब उद्यापन कर दे।

सोने की यह असमर्थ हो तो चांदी की मूर्ति बनवाएं और किसी विद्वान ब्राह्मण के द्वारा पूजन, हवन आदि करें। मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा करके पंचामृत से स्नान कराके शोर उपचार से उसकी पूजा करें।

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साथ में चित्रगुप्त जी की भी पूजा करें और सफेद काले तिलों के लड्डू का भोग लगाएं। हमारी पूर्ण पुष्टि के लिए ब्राह्मण को भोजन कराएं। और बांस की छावरी में 5.25 से धान्य ज्वार जो मुक्त तुल्य मानी जाती है, किसी मंदिर या ब्राह्मण को भेंट करें।

इससे के साथ ही सुन्दर बनी हुई सैयां मुलायम गद्दा, रजाई और तकिया हूँ। इसके अलावा कमल पादुकाएं, लकड़ी या डंडा, लोटा रोल, पांच कपड़े भी। धर्मराज की नियमित और यदि समर्थ हो तो श्वेत, काली या लाल गाय चित्रगुप्त के नियमित धर्मराज मंदिर में दान करें।

गुणवती ने धर्मराज जी से प्रार्थना की कि हे प्रभु यदि ऐसी बात है तो यमदूतों से मुझे छुड़वाकर फिर संसार में भेजिए, जिससे मैं आपके कथा का प्रचार कर सकू। भगवान धर्मराज ने गुणवती को भूलो पर वापस जाने की स्वीकृति दी थी।

उसी समय। उसकी मृत शरीर में पुनः प्राणों का संचार हो गया और उसके पुत्र कहने लगे हमारी माताजी जीवित हो गए। इसके बाद गुणवती ने अपने पति और पुत्र आदि को सब बातें बताई, जो धर्म राज्य में मनुष्य के कल्याण के लिए कही थी और गुणवती ने मकर संक्रांति से विधिवत उसने धर्म राज्य की प्रतिदिन पूजा और कथा आरंभ कर दी और स्वर्ग जाने के लिए दान, पुण्य कर्म आदि भी आरंभ करने लगी।

इस प्रकार गुणवती साल भर कथा सुनकर धर्म के 10 अंगों का पालन करके जब पुन मृत्युपरांत वापस वर्ग में गयी तो देवताओं ने गुणवती का आदर किया और सदा स्वर्गीय रहो कहा। धर्मराज यमराज, जिसप्रकार आपने गुणवती को मार्ग दिखाकर उस पर अपनी कृपा की।

उसे ज़रा आप की कहानी सुनने वाले, हुंकार भरने वाले, आपके पूजा पाठ करने वाले, सभी पर अपनी कृपा बनाए रखना, उसकी सारी मनोकामनाएं भी पूरी करना। बोलो धर्मराज यमराज की जय।

मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव की पूजा कैसे करें।

फ्रेंड मकर संक्रांति के दिन सूर्य भगवान की पूजा अर्चना का विशेष महत्व होता है देखिए भगवान सूरज को नौ ग्रह का राजा माना जाता है अगर सूर्य भगवान अगर प्रसन्न है तो फिर आपकी उन्नति और तरक्की को कोई नहीं रोक सकता।

इसलिए हमें मकर संक्रांति के दिन सूर्यदेव का पूजन अवश्य करना चाहिए देखिए पूजन के लिए आप बेसिक जो चीजे होती है वहीं लगेंगी हम यहाँ पर जल, रोली, गुड, तिल, पुष्प, एक दिया, साथ ही हमें खाली पात्र ले लेंगे।

आप थाली या कोई भी बड़ा बर्तन ले सकते हैं या खाली गमला भी ले सकते हैं इसके बाद देखिए जहाँ से भी आपको सूर्यदेव के सीधे दर्शन होते हैं चाहे आप की छत पर या आपके आंगन में वहाँ पर आप पहले थोड़ा साफ कर लें।

उसके बाद देखिए हम वहाँ पर स्वस्तिक का चीन बना लेंगे इसके बनाने के बाद हम अपना पूजन शुरू करेंगे ये सूर्य भगवान की पूजा में जल सींचने का विशेष महत्व होता है तो सबसे पहले तो हम अपना जल का लोटा तैयार कर लेंगे। हमें तांबे के लौटे में जल लेना चाहिए।

उसके साथ ही देखिए इस जल में अगर आपको बहुत ज्यादा गुस्सा आता है तो फिर आप हल्दी जरूर डाल दीजिएगा साथी हम यहाँ पर रोली डाल लेंगे उसके साथ साथ हमे थोड़े से इस जल में चावल डाल लेने हैं तिल हमें जरूर डालने है मकर संक्रांति की पूजा में तिल दान का विशेष महत्व होता है। आप थोड़ा सा हमें मीठे के लिए गुड डाल लेना है और उसके साथ साथ अगर आपको लाल रंग के फूल मिल जाते हैं तो लाल रंग के पुष्प आप डाल दीजिए इस तरह से हमारा जल तैयार हो जाएगा।

अब हमें जल चढ़ाना है तो देखिए जल चढ़ान के लिए अपने हाथों को ऊपर करना है आपको जितना ऊपर उठा सकते हैं और साथ ही आपको सीधे जमीन में जल नहीं चढ़ाना चाहिए किसी के पैरों में नहीं आना चाहिए तो इसलिए मैंने यहाँ पर ये खाली पात्र ले लिया है।

आप चाहे तो आप गमला भी ले सकते हैं या आप कोई भी इस तरह से खाली पात्र ले लीजिए और उसमें हम जल चढाने के बाद हम तीन बार परिक्रमा करेंगे तो जहा पर आप करे है वहीं पर खड़े होकर आप तीन बार सूर्य देव की परिक्रमा कर लें। तो इस तरह से हम लोग परिक्रमा करके सूर्यदेव को नमस्कार करेंगे।

उसके बाद जहाँ पर स्वस्तिक बनाया था वहाँ पर हम दिया जला देंगे उसके बाद हम सूर्य भगवान की आरती उतारेंगे और दीया दिखाने के बाद हम सभी चीजें चढ़ाएंगे तो देखिए हमें यह पर जमीन पर है चढ़ानी है ना की उनकी तरफ ऐसे फेंकनी है।

सूर्यदेव की पूजा में लाल रंग फूल चढ़ाये तो ज्यादा लाभ मिल ता है। अगर आपको ज्यादा गुस्सा है आता है तो आप हल्दी सीधे जरूर सूर्यदेव को समर्पित करें कि आपकी गुस्सा शांत होगा। सामको जो जल और बाकि सामग्री को अपने चढ़ाया था उसे हम पौधे में डालं देंगे।

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Makar Sankranti Quotes In Hindi

काट ना सके कभी कोई पतंग आपकी,
टूटे ना कभी डोर आपके विश्वास की
छू लो आप जिंदगी के सारे कामयाबी,
जैसे पतंग छूती है ऊंचाइयां आसमान की
Happy Makar Sankranti


सपनों को लेकर मन में
उड़ाएंगे पतंग आसमान में
ऐसी भरेगी उड़ान मेरी पतंग
जो भर देगी जीवन में खुशियों की तरंग.
Happy Makar Sankranti


मीठे गुड़ में मिल गए तिल
उडी पतंग और खिल गए दिल
हर पल सुख और हर दिन शांति
आप सबके लिए लाए मकर संक्रांति
Happy Makar Sankranti


मूंगफली की खुश्बु और गुड़ की मिठास,
दिलों में खुशी और अपनो का प्यार,
मुबारक हो आपको
मकर संक्रांति का त्यौहार
Happy Makar Sankranti


सूरज की राशि बदलेगी,
कुछ का नसीब बदलेगा,
यह साल का पहला पर्व होगा
जब हम सब मिल कर खुशियां मनाएंगे
Happy Makar Sankranti


मंदिर की घंटी, आरती की थाली,
नदी के किनारे सूरज की लाली,
जिन्दगी में आये खुशियों की बहार,
आपको मुबारक हो संक्रांत का त्यौहार
Happy Makar Sankranti


सजने लगी है आरती की थाली…
मंदिर में बजने लगी हैं घंटियां
और सजने लगी हैं आरती की थाली
सूर्य की रोशन किरणों के साथ
अब तो सुनाई देती है एक ही बोली
मकर संक्रांति की शुभकामनाएं
Happy Makar Sankranti


“यादें अक्सर होती है सताने के लिए,
कोई रूठ जाता है फिर मान जाने के लिए
रिश्ते निभाना कोई मुश्किल तो नही,
बस दिलो में प्यार चाहिए उसे निभाने के लिए!!!


खुले आसमा में जमी से बात न करो..
ज़ी लो ज़िंदगी ख़ुशी का आस न करो..
हर त्यौहार में कम से कम हमे न भूलो करो..
फ़ोन से न सही मैसेज से ही संक्राति विश किया करो !


पल पल सुनहरे फूल खिले,
कभी न हो काँटों से सामना,
जिंदगी आपकी खुशियो से भरी रहे,
यही है संक्रांति पर हमारी शुभकामना


Makar Sankranti Wishes in Hindi

इस वर्ष की मकर संक्रांति,
आपके लिए हो तिल लड्डू जैसी मीठी !
मिले कामयाबी पतंग जैसी उँची,
इसी कामना वाली मकर संक्राति !!


बिन बादल बरसात नहीं होती,
सूरज के उगे बिना दिन की शुरुआत नहीं होती!
हम जानते है हमारे बिना विश की आप की
कोई त्यौहार शुरुआत नहीं होती,
आप सभी को मकर संक्रांति की हार्दिक


मूंगफली की खुशबू
गुड़ की मिठास
दिलों में खुशी
अपनों का प्यार
मुबारक हो आपको
मकर संक्रांति का त्योहार!!!


उड़ी जो पतंग तो खिल गया दिल
गुड़ की मिठास में देखो मिल गया तिल
चलो आज उमंग-उल्लास में खो जाएं हम लोग
सजाएं थाली और लगाएं अपने भगवान को !!


दिल में है छायी मस्ती
मन में भरी है उमंग
उड़ती हैं पतंगें रंग बिरंगी
आसमान में छाया मकर संक्रांति का रंग!!

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